कोरोना की मुक्ति में व्यक्ति की भूमिका पर निबंध। Essay In Hindi

 


इस आर्टिकल को लिखने का मुख्य उद्देश्य है कि किसी भी परीक्षा में पूछे जाने पर आप निबंध के रूप में लिख सकते हैं। कोरोना से मुक्ति में व्यक्ति की भूमिका तात्कालिक घटना है। ऐसे निबंध परीक्षा, प्रतियोगिता परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने इस निबंध को लिखा है। यह कक्षा 9 से 12 तक आने वाले परीक्षाओं के दृष्टिकोण को रखकर लिखा गया है। इसे पढ़ें तथा मार्गदर्शन प्राप्त कर अपनी भाषा में परीक्षा में लिख सकते हैं। यह लगभग 400 से 500 शब्दों का है परीक्षाओं में 300 से 350 शब्दों का आता है इसी को आधार मानकर मैंने मैंने यह लिखा है।


कोरोना की मुक्ति में व्यक्ति की भूमिका पर निबंध


विश्व में अनेक आपदाएं आई, गई, उनमें से कोरोना महामारी जैसे आपदा विश्व के रंगमंच पर एक नाटककार की भांति उदित हुआ। जैसे सौरमंडल का मुखिया अपनी दिव्य ज्योति और प्रकाश से अन्य ग्रहों को प्रकाशित करती है । ठीक उसी प्रकार कॉरोना अपनी भयावता के लिए जानी जाती है। चीन के वुहान में जन्म लिया कोरोना विश्व भ्रमण करते हुए अनेक समुद्र को लांघते हुए यौवन काल में भारत पहुंचा तो उसका कुछ रूप अलग था ऐसी स्थिति में मानव की भूमिका अहम हो जाती हैजिस मानव के संसर्ग में आते हैं, आते ही कोरेना भयावता को पैदा करती है इससे इसकी क्रियाशीलता को समझा जा सकता है इसने जो भय पैदा किया मानव मानव को पृथक करने की रणनीति बनाई व्यक्ति को प्रभावित किया इस प्रभाव को रोकने के लिए कोरोना के बनावट कार्यशैली उसके स्वभाव उसकी प्रकृति का अध्ययन जरूरी हो जाता है वुहान से निकले हुए कोरोना की प्रकृति और अन्य देशों में जैसे अमेरिका, इटली, रूस, आदि देशों के साथ भारत आते ही उसके प्रकृति के बदलाव ने हमें और भी उलझन में डाल दिया। सुबह का किया गया अध्ययन शाम होते-होते बदल जाता है। दिन का किया गया शोध रात में बदल जाता है। ऐसी स्थिति में विजय प्राप्त करना एक जटिल और कठिन कार्य बन जाती है। हमें क्या करना चाहिए?

सीधी सी बात है जब हम उसकी प्रकृति और विनाश का परिणाम ढूंढ लेंगे तब तक न जाने करोड़ों जिंदगियां को अपने आवेश में ले लेगी। जीवन संकटमय हो जाएगा।अब प्रश्न ये उठता है कि हमें क्या करना चाहिए? हमें सावधानी बरतनी चाहिए जिस रास्ते से होकर वह हमारे पास आता है चाहे वह सजीव हो या निर्जीव उससे दूरी बनानी होगी। हर आहट और स्पर्श को ध्यान में रखना होगा।


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तभी हम लोग इस आपदा का सामना कर सकेंगे। तबाही को कम किया जा सकता है। यह तो व्यक्ति की भूमिका पर निर्भर करती है। जिस प्रकार आग का उपयोग खाना बनाने के लिए किया जा सकता है तथा आग लगाने के लिए भी किया जा सकता है। ठीक उसी प्रकार व्यक्ति की अहम भूमिका इस बात को निर्देशित करेगी कौन सा रास्ता अपनाना है। एक सफल नागरिक की भूमिका को निभाते हुए, उसके बचाव के उपायों पर विचार करते हुए उस पर नियंत्रण करना है। यह तो व्यक्ति के विवेक पर निर्भर है। एक सफल नागरिक बनते हुए, देश की सेवा भाव से, अपनी कल्पना से साकार करने के लिए अपनी जवाबदेही को निर्धारित करते हुए इस पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

भारत सरकार तथा राज्य सरकार के आपदा नियंत्रित कानून का पालन करना होगा। एक प्रहरी की भांति सजग रहना होगा। अफवाहों से बचना होगा। भारत की चिकित्सा व्यवस्था पर विश्वास रखना होगा और उस पर अमल करना होगा। सरकार के गाइडलाइन का अनुपालन अक्षरस करना होगा। घर और बाहर दोनों तरफ अहम जिम्मेदारियां निभानी होगी। एक सफल नागरिक की भूमिका निभानी होगी।

मैंने अपनी योग्यता और क्षमता के आधार पर निबंध लिखा है। अगर आपको यह लगता है कि यह आर्टिकल थोड़ा भी आपको निबंध लिखने में सहायक हो, तो इसे अपने वर्ग साथी के साथ शेयर जरूर करें। इससे मेरा हौसला बढ़ेगा और मैं आगे भी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से आर्टिकल देता रहूंगा। कमेंट में यह बता सकते हैं की किस आर्टिकल पर निबंध की आवश्यकता है तो मैं देने का प्रयास करूंगा।


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